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Kitna Badal Gaya Insaan Lyrics कितना बदल गया इन्सान

कितना बदल गया इन्सान....

स्थाई: देख तेरे संसार की हालत, 
क्या हो गई भगवान।
कितना बदल गया इन्सान, 
कितना बदल गया इन्सान ।
सूरज न बदला, चाँद न बदला, 
ना बदला रे आसमान ।
कितना बदल गया इन्सान, 
कितना बदल गया इन्सान ||

आया समय बड़ा बेढंगा, 
आज आदमी बना लफंगा ।
कहीं पे झगड़ा कहीं पे दंगा, 
नाच रहा नर होकर नंगा ।
छल और कपट के हाथों अपना, 
बेच रहा ईमान ॥

राम के भक्त रहीम के बन्दे, 
रचते आज फरेब के धन्धे ।
कितने ये मक्कार ये अन्धे, 
देख लिए इनके भी धन्धे ।
इन्हीं की काली करतूतों से, 
हुआ ये मुल्क मसान ॥

जो हम आपस में न झगड़ते, 
बने हुए क्यों खेल बिगड़ते ।
काहे लाखों घर ये उजड़ते, 
क्यों ये बच्चे माँ से बिछड़ते।
फूट-फूटकर क्यों रोते, 
प्यारे बापू के प्राण ॥
      ✽✽✽✽✽

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