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दो दिन का जग में मेला भजन लिरिक्स Do Din Ka Jagh Mai Mela Bhajan Lyrics

दो दिन का जग में मेला.....

स्थाई: दो दिन का जग में मेला, 
सब चला चली का खेला रे ॥

कोई चला गया कोई जावे, 
कोई गठड़ी बाँध सिधावे ।
कोई खड़ा तैयार अकेला, 
सब चला चली का खेला रे ॥

कर पाप कपट छल माया, 
धन लाख करोड़ कमाया ।
संग चले ना एक अधेला, 
सब चला चली का खेला रे ॥

नारी मात पिता सुत भाई, 
कोई अंत सहायक नाँहि ।
क्यों भरे पाप का ठेला रे, 
सब चला चली का खेला रे ॥

यह नाशवान संसारा, 
कर भजन हरि का प्यारा ।
ब्रह्मानन्द कहे सुन चेला, 
सब चला चली का खेला रे ॥
           ✽✽✽✽✽

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