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Tandhari Jagh Mei Awadhu Bhajan Lyrics तनधारी जग में अवधु भजन

 तनधारी जग में अवधु.....


दोहा: कोई तन दुखी कोई मन दुखी, 
कोई धन बिन फिरे रे उदास ।
थोड़ा-थोड़ा सब दुखी, 
सुखी राम का दास ॥

स्थाई: तनधारी जग में अवधु, 
कोई नहीं सुखिया रे ।
जनम लियोड़ा सब, 
दुखिया है रे लोक ॥

ब्रह्मा भी दुखिया अवधु, 
विष्णु भी दुखियारे ।
दुखिया दशों, अवतारा है रे लोक ॥

धरती भी दुखिया अवधु, 
अम्बर भी दुखिया रे ।
दुखिया पवना पाणी है रे लोक ॥

राजा भी दुखिया अवधु, 
प्रजा भी दुखिया रे ।
दुखिया सकल संसारा है रे लोक ।।

शरणे मच्छेन्दर जती, 
गोरख बोले रे ।
रामजी ने भजे वो ही, 
सुखिया है रे लोक ॥
        ✽✽✽✽✽

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