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Avsar Ayo Re Tiran Ro Moko Bhajan Lyrics अवसर आयो रे तिरण रो मौको भजन

अवसर आयो रे तिरण रो मौको.....

 

दोहा: संत मिलन को चालिये,

तज माया अभिमान।

ज्यूं-ज्यूं पग आगे धरे,

कोटि यज्ञ समान ।।

 

स्थाई: अवसर आयो रे तिरण रो मौको आयो रे

भाई-भाई ले सतगुरु की शरण,

तिरण को मौको आयो रे

 

शुभ कर्मों से नरतन पायो,

अब तक सोच समझ नहीं लायो

बणकर आयो बींद नींद में,

कैसे सोयो रे

 

जो तुम अपनी मुक्ति चावो,

 दश दोषों को दूर हटावो

पाणी पेली पाळ बांध ले,

गाफिल क्यूं सोयो रे

 

चोरी जारी और जिव हत्या,

निन्दा बतियाँ गाळी बखियां

हरष शोक अभिमान झूठ,

दश दोष बतायो रे

 

राजा रावण और शिशुपाला,

जरासन्ध बाणासुर मारा

बड़ा-बड़ा भूप हुआ धरण पर,

पतो नी पायो रे

 

ये दिन सारा बीत जावेला,

फिर चौरासी में मिलणा वेला

झूठ कपट रो छोड़ मारग ,

सीधो बतायो रे

 

रामानन्द गुरु साँची केवे,

जाग जीव गुरु हेला देवे

कहे कबीर विचार मिनख तन,

मुश्किल पायो रे

             ✽✽✽✽✽

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