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Mor Raja Ri Mahima Bhajan Lyrics मोर राजा री महिमा भजन

मोर राजा री महिमा..... 

दोहा:- तारो की ओट में चन्द्र छिपे ना,
सूर्य छिपे ना बादल छाया। 
चंचल नारी के नैन छुपे ना,
भाग छुपे ना भभूत लगाया। 
रण चढ़ियां राजपूत छुपे ना,
दातार छुपे ना घर मांगण आया।
कवि गंग कहे सुण शाह अकबर, 
कूड़ छिपे ना सत्संगत आया।।

जो कुछ लिखा लिलाट पर, मेट सके ना कोय। 
कोटि यतन करते फिरो, तो अनहोनी ना होय।।

स्थाई:- सिंवरूँ शारद मात, निवण कर गुरु मनावूँ। 
नर-नारी उपदेश, गजानन तुमको ध्यावूँ। 
मोरधज महिमा कहूँ रे, सुणो सकल नर नार। 
मोरधज महिमा सुण्यां सूं , पाप दूर होई जाय,
मोर राजा री महिमा।
हे सुणो सभा चित लाय, भगत री साँची महिमा।।

राजा बीसल राव के लोवा नगर केवावे। 
जिण रे कन्या सात, एक रो वर नहीं पावे। 
राजा मन चिन्ता भई रे, पुत्र न दीनो एक। 
कौण कर्म कन्या तणा, लिख्या कठे है लेख,
मोर राजा री महिमा।।

पूछे मायर बाप, जनम रा बंधु भाई। 
भाग किण रो खाय, राव बीसल री जाई। 
बार-बार तुझको केवां रे, सुण ले पदम कंवार। 
पदमा बीसल राव री, तू भाग किणे रो खाय,
मोर राजा री महिमा।।

राज तेज बड़ रीत, जोग भगवत रे सारे। 
नहीं है मारा भाग, पिताजी थारे लारे।    
जो रेखा मस्तक लिखी रे, लिख दीनी किरतार। 
पदमा बीसल राव री, आ तो भाग आपरो खाय,
मोर राजा री महिमा।।

दोहा:- पंगाज खोड़ो मोर नगर में, चूण चुगे नित आय। 
दरवाजां में बैठतां, वो विपरां पकड्यो जाय।।

पकड़ ले गया मोर, राव ने बात सुणाई। 
चोखी ढली सब रात, एक ने नींद न आई। 
इण बाई रे कारणे रे, कुण भटकण ने जाय। 
राजन मुख सूं यूं कयो, अब देवो मोर परणाय,
मोर राजा री महिमा।।

बणी बाई री जोड़, हथेल्यां चूण चुगावे।
भव भव रा भरतार, चूण चुगण ने आवे। 
लिख्या विधाता लेख, रती नहीं खाली जावे। 
सारो नगर सरावियो रे, आयो सभा ने दाय। 
राजा मुख सूं यूं कयो, अब जावो मोरिया रे लार.
मोर राजा री महिमा।।

कोई बोली-बोली पदम कंवार, पिता सुण अरज हमारी। 
पिता क्या मांगू कर आस, नीच है बुद्धि रे तुम्हारी। 
पक्षी पिता परणाय के रे, क्या देवे मोहे दान। 
पक्षी जुण मो कूं भरी, म्हाने करी-करी मोरिया रे लार।।

काला करावो वेश, काला दो बैल जुतावो। 
नहीं कोई संग में जाय, नहीं कोई मारग बतावो। 
पदमा बैठी बैल में रे, लियो मोर ने पास।
मात पिता मन खेंचियो, अब छोड़ी पीवर री आस,
मोर राजा री महिमा।।

उड़िया सारंग जीव, मोर जंगल में जावे। 
बैठा तरवर आय, पाप नहीं पले लगावे। 
इण नगरी में पाणी पिऊँ नहीं, चुगो करूँ अठे नाँय। 
मैं पँछी जंगल में राजी, बैठा तरवर आय,
मोर राजा री महिमा।।

पवन चले परचण्ड, पेड़ रो टूटो डालो। 
पड्यो मोर रे शीश, मोर कियो कूकारो। 
पंजा पंख चाले नहीं रे, गर्दन दीनी ढेर। 
पलके सूं पदमा गई, करी पलक न देर,
मोर राजा री महिमा।।

हे कुरजां, म्हारी बेनड़ी। 
हे झुरे रे बेटी आय, पदमा रूदन करे।।
हे मोर, पति ने कद देख सूं।  
हे करि काजळिया री कोर, पदमा रुदन करे।।
                         ✽✽✽✽✽ 

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