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Man Mera Satguru Kar Mera Bhai Bhajan मन मेरा सतगुरु कर मेरा भाई



मन मेरा, सतगुरु कर मेरा भाई 

दोहा:- सतगुरु ऐसा कीजिये, दुखे दुखावे नाँय। 
पान फूल तोड़े नहीं, रेवे बग़ीचा माँय।।

स्थाई:- मन मेरा, सतगुरु कर मेरा भाई। 
सतगुरु बिना संगी नहीं तेरा, अंत समय रे माँहि।।

जब महा कष्ट पड़े जीव माथे, कोई आड़ो नहीं आई। 
मात-पिता थारो कुटम्ब कबीलो, सगळा मुंडो छुपाई,
मन मेरा, सतगुरु कर मेरे भाई।।


धन दौलत और महल मालिया, सब धरा रह जाई। 
जम रा दूत पकड़ ले जावे, जूता खावतो जाई,
मन मेरा, सतगुरु कर मेरे भाई।।

राज तेज री धरे हिमायत, देवां री चाले नाँहि। 
सतगुरु देख्यां जम दूर खड़ा रे, भाग जाय जमराई,
मन मेरा, सतगुरु कर मेरे भाई।।

सतगुरु वे तो बंधन छुडावे, और निर्भय हो जाई। 
अचलूराम तज सकल आसरो, शरण चरण सुख पाई,
मन मेरा, सतगुरु कर मेरे भाई।।
                                   ✹✹✹✹✹

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