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Bhalai Kar Bhala Hoga Bhajan Lyrics भलाई कर भला होगा भजन

भलाई कर भला होगा..... 

स्थाई:- भलाई कर, भला होगा, बुराई कर बुरा होगा। 
कोई देख न देख पर, खुदा तो देखता होगा।।

ये गठरी पाप की सर पर, लिए फिरता है क्यूं नादान। 
भलाई से तू मुँह को मोड़कर, बैठा क्यूं नादान। 
ये दुनिया चार दिन की है, फिर इसके बाद क्या होगा।।

अभी जितना भी जी चाहे, लगा ले आग पानी में। 
एक ऐसा वक्त भी आयेगा, तेरी जिन्दगानी में। 
न कोई होगा तेरा बस, उसी का आसरा होगा।।

ज़रा दौलत जो हाथ आई है, तो मखरूर बन बैठा। 
दिल-ए-इन्सानियत के, वासते नासूर बन बैठा। 
खबर भी है तुझे एक रोज, तेरा खातमा होगा।।

यहाँ से जिन्दगानी तेरी, खाली हाथ जाएगी। 
फकत करनी तेरी दुनियाँ, से तेरे साथ जाएगी। 
वहाँ के वासते भी कुछ न कुछ तो सोचना होगा।।

ये अंगारे न चुन तू, दामन फूल से भरे ले। 
अभी बाकी है कुछ दिन, जिन्दगी के नेकियाँ कर ले। 
बहुत पछताएगा ये वक्त भी, जब जा चुका होगा।।

न इज्जत काम आयेगी, न शोहरत काम आयेगी। 
न दौलत काम आयेगी, न ताकत काम आयेगी। 
अरे नादान सोचा है तेरा, अन्जाम क्या होगा।।

बुराई बोझ बनकर तेरे, सर पे आ खड़ी होगी। 
तेरे दिल की सिहायी, सामने तेरे खड़ी होगी। 
तेरी बेचारगी पर तेरा, साया हँस रहा होगा।।

जवानी के ये दिन एक रोज, तुझको याद आयेंगे। 
तेरे आमाल तुझको, खून के आँसू रुलाएंगे। 
अकड़कर चलने वाले, तू सहारा ढूंढता होगा।।

न हमहद और न ये, अपने बेगाने साथ जायेंगे। 
न दुनियाँ और न दुनियाँ के, खजाने साथ जायेंगे। 
मनों मिट्टी के निचे कब्र में, तू सो रहा होगा।।

दुआओं से अगर दामन को, भर लेता तो अच्छा था। 
कभी इस बात पर भी गौर कर, लेता तो अच्छा था। 
तू आखिर क्या करेगा जब, खुदा का सामना होगा।।

कभी ईमान से मुँह मोड़ना, अच्छा नहीं होता। 
के इन्सानों के दिल को तोड़ना, अच्छा नहीं होता। 
ये दर्पण टूट जाएगा तो, मुश्किल जोड़ना होगा।।

मुसल्लत गुलशने हसती पे, वीरानी नहीं होगी। 
खुदा के नेक बन्दों को, परेशानी नहीं होगी। 
के इनके वासते जन्नत का, दरवाजा खुला होगा।।
                           ✽✽✽✽✽     

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